वन विभाग हेल्पलाइन नंबर मध्य प्रदेश 2024 Latest

मध्य प्रदेश के वन संपदा पूरे देश में प्रचलित है और इसके लिए सरकार के इतने कड़े कानून है कि लोगों को माफ करने जैसे कोई नियम लागू ही नहीं होते। वन विभाग के अंतर्गत किसी भी तरीके से जुर्म के रूप में पकड़ा जाने वाला व्यक्ति पूरी जिंदगी ही बर्बाद कर लेता है क्योंकि इसमें बहुत कड़ी सजा मिलती है। वन विभाग के द्वारा हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है जिसके बारे में आज हम चर्चा करने वाले हैं और वन विभाग के अंतर्गत किस तरीके से सूचना प्रौद्योगिकी कार्य करती है इसके बारे में भी चर्चा करेंगे ।

वन विभाग हेल्पलाइन नंबर

सुबह 8:30 बजे से लेकर रात्रि 10:00 बजे तक मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा यह नंबर 0755 या 2674 240 हमेशा अवेलेबल रहता है जिस पर जाकर आप वन विभाग के लिए शिकायत दर्ज कर सकते हैं । वन विभाग से संबंधित कभी किसी भी तरीके से कोई भी बयान दर्ज करने के लिए या फिर वन विभाग के द्वारा कोई भी हेल्प लेने के लिए आप उपयुक्त नंबर को डायल कर सकते हैं और संपर्क कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश वन विभाग की सामान्य जानकारी –

मध्य प्रदेश में वन विभाग की स्थापना 1860 में हो चुकी थी और इसके तुरंत बाद से ही वनों के लिए कई ऐसे कार्य शुरू हुई जिससे वन संपदा में वृद्धि की जा सके। वन विभाग के अंतर्गत कई सरकारी कर्मचारियों को तैनात किया जाता है जो वन विभाग की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार ठहराए जाते हैं और वन संपदा की देखरेख भी उन्हीं की जिम्मेदारी में की जाती है। भारत की प्रथम वन नीति जब से 1984 में स्टार्ट हुई तब से वनों के लिए न जाने कितने कानून पास हुए और वनों के लिए बहुत ही कठिन कानून पारित किए गए जो बहुत ही दर्दनाक सजा के प्रावधान के प्रारूप के अंतर्गत आते हैं।

वन विभाग का कार्य–

वन विभाग का सबसे पहला कार्य होता है वनों की सुरक्षा करना और वन के अंतर्गत आने वाली वन संपदा और वन्यजीवों की रक्षा करना। आजकल लोग इतने निर्दय हो गए हैं कि अभी भी अगर वनों को सुरक्षा के अंतर्गत ना रखा जाए तो वन्य जीवों को पूरी तरीके से लापता कर दिया जाएगा। इसीलिए सरकार के द्वारा बहुत ही ज्यादा सुरक्षा वनों को प्रदान की गई और वन विभाग की एक लंबी टीम के संरक्षण में वनों को रखा जाता है।

वन विभाग के द्वारा वनों के संरक्षण में किया जाने वाला प्रयास–

वन विभाग के अंतर्गत कई डिपार्ट एक साथ कार्य करते हैं जिनके अलग-अलग कार्य होता है और अलग-अलग समय पर ड्यूटी के लिए उन्हें तैयार भी किया जाता है। वन विभाग के अंतर्गत रात के समय में अधिकारियों को अलग ड्यूटी के लिए टाइम दिया जाता है और दिन के समय में अलग टाइम दिया जाता है क्योंकि रात के समय में वन्य जीवों की सुरक्षा ज्यादा जरूरी होती है और दिन की अपेक्षा रात में ही वन्य जीव इधर के उधर होने लगते हैं। वनों की सुरक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा वातावरण के लिए और पर्यावरण के लिए आवश्यक है क्योंकि पर्यावरण में जीवों को अगर सुरक्षा नहीं दी गई तो मानव जीवन भी खतरा में आ जाएगा।

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